रहीम के दोहे

Semester IV (REDUCED)                                 रहीम के दोहे कवि परिचय रहीम का पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । इनके पिता बैरम खान है इनका जन्म 1554 में हुआ । इनका पालन-पोषण अकबर ने किया । अकबर के दरबार में वह महत्वपूर्ण पद में रहते थे। रहीम अरबी, तुर्की, फारसी, संस्कृत और हिंदी के अच्छे ज्ञाता थे । इनकी प्रमुख रचनाएं हैं - दोहावली, नगर शोभा, बरवै नायिका भेद, मदनाष्ट्क, रहीम खेट कौतुकम, रासपंचाध्यायी, रहीम सतसई, श्रृंगार सतसई, श्रृंगार सोरठा।     रहीम ने विभिन्न भाषाओं और काव्य शैलियों में रचनाएं की हैं । इनके काव्य मे सूक्ष्म जीवन अनुभूति और नीति मिलती है । उनके दोहों में नीति ज्ञान और श्रृंगार की त्रिवेणी प्रवाहित है।        संदर्भ सहित व्याख्याएँ: 1. रहिमन तब तक  ठिहरिये, मान मान सम्मान ।    घटत मान देखिए जबहि, तुरतहि करिय  पयान।।     कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है यह अकबर के दरबारी कवि थे। विशेष संदर्भ: मानव के स्वाभिमान के बारे में बताया है। भावार्थ: रहीम कहते हैं किसी भी व्यक्ति को तब तक कहीं रहना चाहिए जब तक दान, मान और सम्मान मिले। जब देखने में आये कि मान-सम्मान घट रहा है, तो तत्काल वहां से चल देना चाहिए।विशेषताएँ: 1) ब्रज भाषा का प्रयोग 2) लौकिक व्यवहार के बारे मे बताया गया है। 2. रहिमन पानी राखिए,बिन पानी सब सून ।     पानी गए न उबरहि, मोती मानुष चून।।          कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है।                   उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।  विशेष संदर्भ : इस दोहे मे रहीम मनुष्य को मर्यादा,        गौरव  की अनिवार्यता के बारे में बता रहे हैं।भावार्थ: दोहे में रहीम ने पानी को तीन अर्थों में प्रयोग किया है। ... रहीम का कहना है कि जिस तरह आटे का अस्तित्व पानी के बिना नम्र नहीं हो सकता और मोती का मूल्य उसकी आभा के बिना नहीं हो सकता है, उसी तरह मनुष्य को भी अपने व्यवहार में हमेशा पानी (विनम्रता) रखना चाहिए जिसके बिना उसका मूल्यह्रास होता है।विशेषता : 1.पानी  विभिन्न अर्थों में आया है                2. सरल शब्दों का प्रयोग। 3. बड़े बड़ाई ना करैं, बड़े न बोलै बोल।     रहिमन हीरा कब कहैं,लाख टका मेरो मोल।।    कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।  विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। इसमें कवि महान लोगों का  गुण बता रहे कि बड़े लोग अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं करते। भावार्थ: महान व्यक्ति अपनी प्रशंसा नहीं करते, ना ही किसी अन्य की निंदा करते हैं । जिस प्रकार हीरे (Diamond) को किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि उसका मोल क्या है।विशेषताएँ: 1. ब्रज भाषा                  2. बड़े व्यक्ति की तुलना हीरे से की है। 4. रहिमन विपदा हू भली जो थोरे दिन होय।     हिते अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।   कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है।उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।  विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। कवि कहते हैं कि संकट के समय ही अपने और पराए की पहचान होती है।   भावार्थ: रहीम कहते हैं कि यदि विपत्ति कुछ समय की हो तो वह भी ठीक ही है, क्योंकि विपत्ति में ही सबके विषय में जाना जा सकता है कि संसार में कौन हमारा हितैषी है और कौन नहीं।   विशेषताएँ : 1. ब्रज भाषा             2. मुसीबत के समय ही व्यक्ति की परख होती है। 5. रहिमन कठिन चितान ते, चिंता को चित चेत।     चिता दहति निर्जीव को, चिंता जीव समेत।। कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है।उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।  विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। कवि कहते हैं कि  चिंता जीवित प्राणी को दहन करने वाली है।  भावार्थ: कविवर रहीम कहते हैं की कठोर चिंताओं के से अपने को मुक्त कर अपने चित पर नियंत्रण करो क्योंकि चिता तो प्राणहीन प्राणी को जलाकर राख कर देती है परन्तु चिंता तो जिंदा प्राणी को ही जलाकर भस्म कर देती है।विशेषताएँ: 1.ब्रज भाषा 2. मनुष्य को चिंता रहित जीवन जीने का सुझाव दिया गया है। 6. जाल परे जलजात बहि, तजि मीनन को मोह।    रहिमन मछरी नीर को,तऊ न छाडंत छोह। ।कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।  विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। इस दोहे मे कवि ने मछली के द्वारा प्रेम की भावना बताई है।   भावार्थ : रहीम कहते हैं कि धन्य है मीन की अनन्य भावना! सदा साथ रहने वाला जल मोह छोड़कर उससे विलग हो जाता है, फिर भी मछली अपने प्रिय का परित्याग नहीं करती, उससे बिछुड़कर तड़प-तड़पकर अपने प्राण दे देती है।विशेषताएँ: 1. ब्रज भाषा       2. जल और मछली के उदाहरण द्वारा प्रेम और वियोग की भावना बताई है। 7. बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय ।      रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय। कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।  विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। इस दोहे में रहीम ने बिगड़ी हुई बात को सुधारा नहीं जा सकता के बारे में बताया है।भावार्थ:मनुष्य को सोचसमझ कर व्यवहार करना चाहिए,क्योंकि किसी कारणवश यदि बात बिगड़ जाती है तो फिर उसे बनाना कठिन होता है, जैसे यदि एकबार दूध फट गया तो लाख कोशिश करने पर भी उसे मथ कर मक्खन नहीं निकाला जा सकेगा।विशेषताएँ: 1. ब्रज भाषा                  2. मानवीय संबंधों के बारे में बताया है। 8. धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाई।    उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाई।   कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।  विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। इसमें अच्छे कर्म से ही पहचान होती है। भावार्थ: - रहीम कहते हैं कि कीचड़ का जल सागर के जल से महान है क्योंकि कीचड़ के जल से कितने ही लघु जीव प्यास बुझा लेते हैं। सागर का जल अधिक होने पर भी पीने योग्य नहीं है। संसार के लोग उसके किनारे आकर भी प्यासे के प्यासे रह जाते हैं। मतलब यह कि महान वही है जो किसी के काम आए। विशेषताएँ: 1. ब्रज भाषा                  2. मानवीय संबंधों के बारे में बताया है।  8. धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाई।  उदधि बड़ाई कौन है, जगत पियासो जाई।     कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।    विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। इसमें अच्छे कर्म से ही पहचान होती है।  भावार्थ: - रहीम कहते हैं कि कीचड़ का जल सागर के जल से महान है क्योंकि कीचड़ के जल से कितने ही लघु जीव प्यास बुझा लेते हैं। सागर का जल अधिक होने पर भी पीने योग्य नहीं है। संसार के लोग उसके किनारे आकर भी प्यासे के प्यासे रह जाते हैं। मतलब यह कि महान वही है जो किसी के काम आए।विशेषताएँ:1. ब्रज भाषा का प्रयोग                2. अच्छे कर्मों से ही व्यक्ति महान बनता है।  9. समय पाय फल होता है, समय पाय झरी जाय।  सदा रहे नहीं एक सी, का रहीम पछताए।। कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।    विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। इस दोहे में रहीम पुरानी बातों पर पछताना व्यर्थ समझते हैं।  भावार्थ:रहीम कहते हैं कि उपयुक्त समय आने पर वृक्ष में फल लगता है। झड़ने का समय आने पर वह झड़ जाता है. सदा किसी की अवस्था एक जैसी नहीं रहती, इसलिए दुःख के समय पछताना व्यर्थ है।  विशेषताएँ: 1. सरल भाषा का प्रयोग          2. समय को बहुत महत्वपूर्ण माना है।  10. जो गरीब पर हित करैं, ते रहीम बड़ लोग ।         कहां सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग।।  कवि परिचय: यह दोहा रहीम के द्वारा लिखा गया है। उनका पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । यह अकबर के दरबारी कवि थे।    विशेष संदर्भ : प्रस्तुत दोहा रहीम के दोहे नाम के पठ्यांश  से लिया गया है। इस दोहे में रहीम मित्रता के साथ-साथ परोपकार गुणों का भी समर्थन कर रहे हैं।   भावार्थ: यहां पर रहीम दास ने अमीर होने के वास्तविक मतलब को बताया है और कहा है की जो गरीब के हित में कार्य करता है उसका हित करता है वहीं बड़ा है धनवान है। जैसे श्रीकृष्ण की मित्रता गरीब सुदामा के लिए एक संयोग था। विशेषताएँ: 1. गरीबों से प्रेम एवं भलाई करने वाले लोग धन्य माने जाते हैं।  2. मित्रता भेदभाव से ऊपर होती है । सुदामा और श्रीकृष्ण के उदाहरण द्वारा रहीम यही बताना चाहते हैं।  दीर्घ प्रश्न उत्तर: 1. रहीम का जीवन परिचय दीजिए? उत्तर: रहीम का पूरा नाम अब्दुल रहीम खानखाना है । इनके पिता बैरम खान है  जो अकबर के मंत्री और सेनापति थे ।इनका जन्म 1554 में हुआ । इनका पालन-पोषण अकबर ने किया । अकबर के दरबार में वह महत्वपूर्ण पद में रहते थे। रहीम अरबी, तुर्की, फारसी, संस्कृत और हिंदी के अच्छे ज्ञाता थे । इनकी प्रमुख रचनाएं हैं - दोहावली, नगर शोभा, बरवै नायिका भेद, मदनाष्ट्क, रहीम खेट कौतुकम, रासपंचाध्यायी, रहीम सतसई, श्रृंगार सतसई, श्रृंगार सोरठा।     रहीम ने विभिन्न भाषाओं और काव्य शैलियों में रचनाएं की हैं । इनके काव्य मे सूक्ष्म जीवन अनुभूति और नीति मिलती है । उनके दोहों में नीति ज्ञान और श्रृंगार की त्रिवेणी प्रवाहित है।         2. रहीम का काव्य परिचय दीजिए?  उत्तर: अब्दुल रहीम खानखाना ने कुल मिलकर 11 रचनाएं रची हैं । उनके ग्रंथ हिंदी की रचनाएं हिंदी साहित्य के नाम से प्रसिद्ध है । उनकी प्रमुख रचनाएं - दोहावली, नगर शोभा, बरवै नायिका भेद, बरवै मदनाष्टक, खेट कौतुकम, जातकम, फुटकर पद, संस्कृत श्लोक,श्रृंगार सतसई, रास पंचाध्यायी, श्रृंगार सोरठा, रहीम सतसई तथा फारसी रचनाएं हैं इनकी दोहावली में 300 दोहे हैं। बरवै नायिका भेद में 19 छंद है । बरवै में 105 और मदनाष्टक में आठ छंद है । फुटकर पद के नाम पर चार कविताओं, पांच सवैयों, दो दोहों तथा दो पदों का संग्रह किया गया है। खेट  कौतुकम जातकम ज्योतिष संबंधी ग्रंथ है।        लघु प्रश्न उत्तर: 1. मान सम्मान शब्दों का अर्थ क्या है ? उत्तर मान का अर्थ है इज्जत प्राप्त करना सम्मान का अर्थ है दूसरों से सम्मानित होना। 2.  पानी शब्द किन अर्थों में आया है ? उत्तर पानी शब्द का अर्थ चमक सम्मान और जल अर्थ में आया है । 3.  'बड़ाई' शब्द किस अर्थ में प्रयोग किया गया है? उत्तर बड़ाई शब्द प्रशंसा, अपने आप की तारीफ के अर्थ में प्रयोग किया गया है । 4. विपदा के आने से क्या लाभ है ? उत्तर विपदा के आने पर अच्छे बुरे मनुष्य की पहचान होती है । 5. चिंता के आने से मनुष्य क्या हो सकता है? उत्तर चिंता के आने पर मनुष्य मानसिक रूप में जलकर मर जाते हैं । 6. खेट कौतुकम जातकम काव्य ग्रंथ किस विषय से जुड़े ग्रंथ है ? उत्तर खेट कौतुकम जातकम काव्य ग्रंथ ज्योतिष विषय से संबंधित ग्रंथ हैं । 7. रहीम के पिता का नाम क्या है? उत्तर रहीम के पिता का नाम बैरम खान है। 8. रहीम द्वारा रचित दोहावली काव्य में कितने दोहे हैं? उत्तर  300 9. रहीम किन के दरबार में नवरत्न कवियों में से एक थे? उत्तर रहीम अकबर के दरबार में नवरत्न कवियों में से एक थे। 10.लाख कोशिश करने पर किसे सुधारा नहीं जा सकता है? उत्तर लाख कोशिश करने पर बिगड़ी हुई बात को सुधारा नहीं जा सकता है।                              ********                  

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