कलम और तलवार
5. कलम और तलवार सारांश : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने 'कलम और तलवार' नामक कविता में कलम और तलवार दोनों को प्रधानता दी है। उनके अनुसार कलम और तलवार दोनों में ही बदलाव लाने की क्षमता होती है। दोनों में ही तेज धार होती है। पर फर्क इतना है कि कलम की धार विचारों को जगाती है, तो तलवार की धार खून की धारा बहा सकती है। कलम के द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति से समाज को जगाया जा सकता है, तो दूसरी और अस्त्र-शस्त्र हाथों में लेकर युद्ध जीता जा सकता है। जहांँ मनुष्य समाज में चेतना पैदा करने की बात आए तो कलम ही कारगर साबित होता है। वही युद्ध में तथा हिंसक पशुओं से आत्मरक्षा हेतु तलवार की आवश्यकता पड़ती है।यदि समाज में चारों ओर सुरक्षा और निर्भरता हो तो अस्त्र शस्त्रों का नहीं बल्कि कलम का ही काम होता है। यह हम पर निर्भर करता है कि हमे किसको अपनाकर समाज का निर्माण करना है। अतः कलम और तलवार में से कलम की शक्ति अधिक है तथा कलम के द्वारा देश में हो रहे भ्रष्टाचार एवं बुराइयों को मिटाया जा सकता है। अतः ज्ञानशक्ति से ही देश की तरक्की...