भगवान बुद्ध के प्रति
भगवान बुद्ध के प्रति
3. भगवान बुद्ध के प्रति
सारांश : भगवान बुध के प्रति कविता सूर्यकांत त्रिपाठी निराला नैंसी है निराला हिंदी युग प्रवर्तक कवि माने जाते हैं उनका जन्म 1 896 में बसंत पंचमी के दिन बंगाल के महिषादल राज्य में हुआ। कवि इस कविता के माध्यम से बता रहे हैं कि संपूर्ण विश्व में आज सभ्यता विज्ञान को ही सब कुछ मान रही है। पूरा विश्व विनाश की ओर जा रहा है वैज्ञानिक साधन केवल सुख के लिए खिलौने मात्र बन गए हैं । सिर्फ पैसे कमाना ही मनुष्य का लक्ष्य हो गया है । पृथ्वी, जल, आकाश, रेल, तार, बिजली, जहाज, हवाई जहाजों में वैज्ञानिकता का प्रचार कर मनुष्य घमंड दिखा रहा है। आध्यात्मिकता पर विश्वास खो कर लोग जनवादी बनकर एक वर्ग दूसरे वर्ग से, एक देश दूसरे देश से और एक का स्वास्थ दूसरे के स्वार्थ से लड़ रहा है ,वर्तमान में लोग आध्यात्मिकता पर विश्वास खो कर अतीत को मानव के लिए भयंकर मानते हैं और कहते हैं कि अतीत में हमारे पूर्वज अतीत में जंगली लोगों की तरह थे, अशिक्षित थे और निपुण नहीं थे । उस समय लोगों को आज की तरह स्वतंत्रता नहीं थी । इस बात का खंडन करते हुए कवि कह रहे हैं कि हे तथागत!तुम जिस प्रकार सत्य वाणी के मंदिर में उतरे थे, उसी प्रकार तुम फिर फिर मानव के मन में उतर रहे हो। हे राजकुमार! भोग से विमुख होकर एक मात्र सत्य के लिए कठिन तपस्या करके तुम अपने लक्ष्य को पहुंच गए और हे तथागत तुमसे विश्व में ज्योति फूटी । मानव सम्मिलित हुए। विरोधी भाव धीरे धीरे नष्ट होने लगे।
भिन्न-भिन्न धर्मों में भिन्न भिन्न रूप से भाव संचित हुए थे। तुम्हारे कारण भौतिक रूप अदृश्य हो गए तुम ही से मानवता की ज्योति प्रकट। निष्कर्ष: कवि निराला ने इस कविता के माध्यम से लोगों में करुणा, दया,मानवता लाने का प्रयत्न किया है । उन्होंने यह आशा जताई है कि भगवान बुद्ध का सत्य मार्ग सारे संसार को मानवता की ओर अग्रसर कर सकता है।
विशेषताएँ: 1. प्रस्तुत कविता में आध्यात्मिकता और रहस्य भावना, प्रेम और सौंदर्य, करुणा, राष्ट्रीयता आदि का सुंदर समन्वय हुआ है ।
2. इस कविता में निराला ने भगवान बुद्ध बताए गए प्रेम का मार्ग बताया है । वो आदर्श कभी पुराने नहीं पड़ सकते बल्कि बदलते समय में और अधिक प्रासंगिक हैं। संदर्भ सहित व्याख्याएँ1. आज सभ्यता के वैज्ञानिक जड़ विकास पर,
गर्वित विश्व नष्ट होने की ओर अग्रसर
स्पष्ट दिख रहा; सुख के लिए खिलौना जैसे
बने हुए वैज्ञानिक साधन; केवल पैसे
आज लक्ष्य में है मानव के; स्थल - जल - अंबर
रेल - तार - बिजली - जहाज नभयानों से भर
दर्प कर रहे हैं मानव, वर्ग से वर्गगण
भिड़े राष्ट्र से राष्ट्र स्वार्थ से स्वार्थ विचक्षणकवि परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला छायावाद कविता के प्रतिनिधि कवियों में एक माने जाते हैं। 1896 में बंगाल के महिषादल राज्य में उनका जन्म हुआ । इन्होंने संस्कृत और बांग्ला भाषा के साथ ब्रजभाषा और खड़ी बोली का अध्ययन किया। संदर्भ: यह पंक्तियां 'भगवान बुद्ध के प्रति' कविताएं कवि निराला जी के अपरा नामक काव्य में संकलित है। निराला जी ने इस कविता में आधुनिक युग की वैज्ञानिक सुविधाओं के साथ-साथ उनसे होने वाले विनाश की ओर संकेत करके भगवान बुद्ध के संदेश को का चुनाव प्रचार करने की आवश्यकता बताई है। व्याख्या: निराला जी कहते हैं आज के लोग वैज्ञानिक आविष्कार करके उनसे सुख सुविधाएं प्राप्त करते हुए यह मान रहे हैं कि यही संपूर्ण विकास है और उस पर गर्व कर रहे हैं । किंतु सभ्यता नाश की ओर आगे बढ़ रही हैं । आज हमें यह बात स्पष्ट दिखाई पड़ती है कि वैज्ञानिक साधन केवल सुख के लिए खिलौने मात्र बन गए हैं। आज मानव का लक्ष्य केवल पैसे कमाना रह गया है । पृथ्वी, जल और आसमान, रेलों, तार, बिजली, जहाज आदि से भर गए हैं। मानव इन साधनों पर गर्व कर अनुभव कर रहा है और एक दूसरे से अपने स्वार्थ के लिए लड़ रहा है। विशेषताएँ: 1. विज्ञान से हो रहे नष्टों को कवि बता रहे हैं।
2. भाषा शुद्ध खड़ी बोली है।
2. हंसते हैं जड़वाद ग्रस्त, प्रेत ज्यों परस्पर,
विकृत-नयन मुख कहते हुए अतीत भयंकर
था मानव के लिए, पतित था वहां विश्वमन,
अपटु अशिक्षित बनने हमारे रहे बंधुगण
नहीं वहां था कहीं आज का मुक्त - प्राण यह,
तर्कसिद्ध है, स्वप्न एक है विनिर्वाण यह।
वहां बिना कुछ कहे, सत्य वाणी के मंदिर,
जैसे उतरे थे तुम, उतर रहे हो फिर फिर
मानव के मन में, -जैसे जीवन में निश्चित
विमुख भोग से, राज कुँवर, त्यागकर सर्वस्थित
एकमात्र सत्य के लिए, रूढ़ि से विमुख,
कठिन तपस्या में, पहुंचे लक्ष्य को, तथागत। कवि परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला छायावाद कविता के प्रतिनिधि कवियों में एक माने जाते हैं। 1896 में बंगाल के महिषादल राज्य में उनका जन्म हुआ । इन्होंने संस्कृत और बांग्ला भाषा के साथ ब्रजभाषा और खड़ी बोली का अध्ययन किया। संदर्भ: यह पंक्तियां 'भगवान बुद्ध के प्रति' कविताएं कवि निराला जी के अपरा नामक काव्य में संकलित है। निराला जी ने इस कविता में आधुनिक युग की वैज्ञानिक सुविधाओं के साथ-साथ उनसे होने वाले विनाश की ओर संकेत करके भगवान बुद्ध के संदेश को का चुनाव प्रचार करने की आवश्यकता बताई है। व्याख्या : निराला कहते हैं मनुष्य जनवादी प्रेतों की तरह विकृत नेत्रों से हंसते हुए कहते हैं कि बीते हुए दिन मानव के लिए भयंकर थे। अतीत में विश्व मन पतित था, हमारे बंधु लोग अतीत में जंगली लोगों की तरह रहते थे। वह अशिक्षित थे। उस समय लोगों को आज की तरह स्वतंत्रता नहीं थी। किंतु यह मुक्ति एक स्वप्न मात्र है। हे तथागत तुम जिस प्रकार सत्य वाणी के मंदिर में उतरे थे, उसी प्रकार तुम फिर मानव के मन में उतर रहे हो। हे राजकुमार भोग से विमुख होकर सब कुछ त्याग कर परंपरागत रूढ़ियों से विमुख होकर एक मात्र सत्य के लिए कठिन तपस्या करके तुम अपने लक्ष्य को पहुंच गए थे। विशेषताएँ: 1. प्राचीन काल में लोग भौतिक जीवन से अधिक आध्यात्म पर अधिक विश्वास रखते थे। 2. गौतम बुद्ध का उदाहरण द्वारा आदर्श एवं त्यागमय जीवन का वर्णन किया है। 3. भाषा शुद्ध खड़ी बोली है।
3. फूटी ज्योति विश्व में, मानव हुए सम्मिलित,
धीरे-धीरे हुए विरोधी भाव तिरोहित;
भिन्न रूप से भिन्न भिन्न धर्मों में संचित,
हुए भाव, मानव ना रहे करुणा से वंचित,
फूटे शत-शत कुछ सहज मानवता जल के
यहां वहां पृथ्वी के सब देशों में छलके;
छल के, बल के पंकिल भौतिक रूप अदर्शित
हुए तुम्ही से, हुई तुम्ही से ज्योति प्रदर्शित। कवि परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी निराला छायावाद कविता के प्रतिनिधि कवियों में एक माने जाते हैं। 1896 में बंगाल के महिषादल राज्य में उनका जन्म हुआ । इन्होंने संस्कृत और बांग्ला भाषा के साथ ब्रजभाषा और खड़ी बोली का अध्ययन किया। संदर्भ: यह पंक्तियां 'भगवान बुद्ध के प्रति' कविताएं कवि निराला जी के अपरा नामक काव्य में संकलित है। निराला जी ने इस कविता में आधुनिक युग की वैज्ञानिक सुविधाओं के साथ-साथ उनसे होने वाले विनाश की ओर संकेत करके भगवान बुद्ध के संदेश को का चुनाव प्रचार करने की आवश्यकता बताई है। व्याख्या: कवि निराला कहते हैं कि - हे तथागत तुम से ही विश्व को प्रकाश मिला। मानव एक हुए । विरोधी भाव धीरे-धीरे नष्ट होने लगे। भिन्न भिन्न रूप से भाव संचित हुए थे। मानव करुणा से वंचित नहीं था । स्वाभाविक रूप से ही मानवता के कई स्त्रोत फूट पड़े । मानवता जल विश्व के सभी देशों में छलक उठा। तुम्हारे कारण ही छल तथा बल के कीचड़ लगे भौतिक रूप अदृश्य हो गए । तुम ही से ही ज्योति प्रकट हुई। विशेषताएँ: 1. भगवान बुद्ध के त्यागमय जीवन का वर्णन।
2. सरल भाषा का प्रयोग।
दीर्घ प्रश्न:
प्र.1 भगवान बुद्ध सारे संसार में किस प्रकार परिवर्तन लाए थे ?
उत्तर: भगवान बुद्ध एक राजकुमार थे। वे एक दिन सत्य को खोजने के लिए संसार से विमुख होकर कठिन तपस्या करते हैं । अंत में उन्हें ज्ञान बोध हो जाता है और असली सत्य को पहचान पाते हैं। वे मानव को मानव बनने के लिए अष्टांग मार्ग अपनाने की बात करते हैं और इससे विश्व में मानवता की ज्योति का संचार करते हैं। इसमें सभी मानव सम्मिलित हुए । विरोधी भाव धीरे धीरे नष्ट होने लगा। भिन्न-भिन्न धर्मों में भिन्न भिन्न रूप से भाव संचित हुए थे। मानवता जल विश्व के सभी देशों में छलक उठा। बुद्ध के कारण ही छल तथा बल के कीचड़ लगे भौतिक रूप की समाप्ति हो गई। भगवान बुद्ध से मानवता की ज्योति प्रकट हुई । प्र. 2 निराला की काव्य कविता शैली के बारे में चर्चा कीजिए ?
उत्तर : कवि निराला के काव्य में भावों के कई चित्र साकार हुए हैं। उसमें आध्यात्मिकता और रहस्य भावना, प्रेम और सौंदर्य, व्यंग्य, करुणा , राष्ट्रीयता आदि का सुंदर प्रकाशन हुआ है । 'जूही की कली' छायावादी विशेषताओं से युक्त प्रेम और सौंदर्य की रचना है । 'तुम और मैं' रहस्यवादी भावनाओं की अभिव्यक्ति है। 'कुकुरमुत्ता' सामाजिक जीवन का यथार्थ चित्रण है । 'राम की शक्ति पूजा' मानव के लिए संदेश देने वाली प्रेरक रचना है । 'बादल राग' क्रांति का उद्घोषक है। 'सरोज स्मृति' कवि की हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति है । इस प्रकार निराला का कविता का अनुभूति पक्ष अत्यंत सबल है । 'वह तोड़ती पत्थर', 'भिक्षुक', 'विधवा' आदि काव्य में करुणा एवं मानवतावाद की भावना का सुंदर प्रकाशन हुआ है। 'जागो फिर एक बार', 'वीणा वादिनी वरदे', 'भारती जय विजय करें' आदि में क्रांति एवं चेतना का स्वर प्रस्फुटित हुए हैं । तुलसी दास आदि रचनाओं में सांस्कृतिक नवोत्थान के साथ अतीत का गौरव गान तथा राष्ट्रीयता का स्वर मुखरित हुआ है।
एक वाक्य में उत्तर दीजिए:
1.सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जन्म कब और कहां हुआ है?
Ans. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जन्म 1896 महिषादल राज्य के मेदिनीपुर जिले के बसंत पंचमी के दिन हुआ।
2. निराला जी के पिता का नाम क्या है?
Ans. निराला जी के पिता का नाम राम सहाय त्रिपाठी था।
3.महिषादल राज्य में निराला जी ने कहां तक शिक्षा प्राप्त की? महिषादल राज्य में निराला जी ने हाई स्कूल में नवी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की।
4.किस उम्र में निराला का विवाह हुआ?
Ans. 15 वर्ष की उम्र में निराला का विवाह मनोहरा देवी से हुआ।
5. निराला जी की मृत्यु कब हुआ?
Ans. 1961 मे। *****
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